College Friends of Amit Ranjan

फ्रेंड्शिप डे, एक ऐसा दिन जो पूरी तरह से दोस्तों को समर्पित है। इसका चलन दक्षिणी अमेरिका से शुरू हुआ और आज यह लगभग पूरे विश्व में अगस्त महीने के पहले इतवार को मनाया जाता है। हालांकि मुझे इस दिन में कोई खास दिलचस्पी नहीं है क्योंकि दोस्तों के लिए तो मेरा हर दिन ही एक फ्रेंड्शिप डे है। मैंने आज का ये दिन अपने एक दोस्त, चन्दन के साथ इको पार्क में मनाया।

School Friendsलेकिन वो वक्त कुछ और था जब मैं हमेशा दोस्तों से घिरा रहता था। आज इस दिन ने भी मुझे उन दिनों की याद दिला ही दी। तब हम ये नहीं जानते थे की फ्रेंड्शिप डे जैसा भी कोई दिन होता है। हमें कोई फर्क नहीं पड़ता था की लोग हमारे बारे में क्या सोचते या कहते थे। हम तो बस दोस्त हुआ करते थे। कभी लड़ते, कभी झगड़ते लेकिन फिर भी साथ ही रहते। अगर हम अपनी साइकिलों पर रेस करते और कोई आगे निकल जाता तो हम चिल्लाते की भाई रुक जा वरना हमारी दोस्ती आज से खत्म। रुका तो ठीक नहीं तो दस मिनट मुंह फुलाने के बाद हम फिर से पक्के वाले दोस्त बन जाते थे।

My School Friendsमेरी जिंदगी में दोस्तों की एक अलग ही जगह है, वैसे हर किसी की होती है। मेरे शुरू से ही काफी दोस्त रहे और मैंने उनके साथ काफी अच्छे पल भी बिताए। और उन्होंने मेरे हर बुरे वक्त पर मेरा साथ भी दिया, बस यही वजह है की मेरी जिंदगी में दोस्ती एक अलग अहमियत रखती है। मुझे आज भी वो दिन याद है जब संस्कृत के सर ने हमें संस्कृत सहचर की किताब खरीदने को कहा था और मेरे एक दोस्त के पास दो थी तो उसने मुझे एक किताब बस यूं ही दे दी बिना किसी शर्त या सवाल के। मुझे याद है जब स्कूल के पिकनिक के लिए मेरे पास पैसे न होने की वजह से मैंने जाने से माना कर दिया था तब मेरे दोस्तों ने और मेरे एक सर ने पैसा मिलाया था। और जब दसवीं के इम्तहान एक वक्त मेरा हाथ टूटा था तब मेरे लिए मेरे दोस्तों ने ट्रेन का पूरा एक डब्बा ही घेर लिया था, ताकि ज्यादा भीड़ की वजह से मुझे कोई तकलीफ न हो। उन्होंने मेरे लिए दवा का इंतजाम किया रुमालों को ज़ोर कर मेरे लिए पट्टी बनाई और देर रात तक मेरे साथ रहे जब तक की मेरा तत्काल इलाज नहीं हुआ।

My Friends of Bokaroजिंदगी के हर मोड़ पर हर किसी को एक दोस्त की जरूरत पड़ती ही है। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही था, जब मैं बोकारो आगे की पढ़ाई पूरी करने गया तब भी मुझे दोस्तों की जरूरत पड़ी। वहाँ भी मेरे काफी दोस्त बने जिनमें से कुछ दोस्त मेरे लिए कुछ ज्यादा खास भी हो गए थे। फिर मैं वापस अपने घर आ गया और यहाँ फिर से मेरे कई कॉलेज के दोस्त बने। वक्त बीतता गया और हम सभी दोस्त अपनी-अपनी दुनिया में व्यस्त होते चले गए।

दोस्त का कोई ज़ात, उम्र, रंग या लिंग नहीं होता, दोस्त तो बस दोस्त होता है। जो आपकी तकलीफ़ों को अपनी तकलीफ समझे और आपकी खुशियों को अपनी बस वही आपका दोस्त है। दोस्ती में कोई शर्त नहीं होती। पर सही दोस्त चुनना आपके हाथ में है। एक सही दोस्त आपको सफलता की सीढ़ी चढ़ने में मदद कर सकता है तो वही एक गलत दोस्त आपको बर्बाद भी कर सकता है। खुशकिस्मती से मेरी जिंदगी में जीतने भी दोस्त आए वे सभी के सभी अच्छे ही थे।

My College Friends

हाँ आज हम भले ही एक दूसरे से काफी दूर हो, एक दूसरे से बात किए हुए जमाना हो जाता है पर फिर भी जब हम मिलते है तो उन पुरानी बातों को याद करके मज़ा आ जाता है। और शायद दूरियों की वजह से भी हमारी दोस्ती और गहरी हो जाती है। सारे दोस्तों में भी कुछ हमारे लिए ज्यादा खास हो जाते है जिनके लिए आप कुछ भी करने को तैयार हो जाते है। और ये भी कोई जरूरी नहीं की जो आपका सबसे पुराना या यूं कहे की बचपन का दोस्त हो वही आपके लिए खास हो सकता है। कुछ दोस्तों को खास होने में ज्यादा वक्त नहीं लगता।

आज लोग Facebook पर दोस्त बनते और बनाते है जो की मेरे पल्ले नहीं पड़ता। मुझे Facebook पर दोस्तों से जुड़े रहना पसंद है, और पहले मैं अपने दोस्त अपनी असल जिंदगी में बनाता हूँ और फिर उनसे Facebook पर जुड़ता हूँ। और यह एक बहुत ही बेहतर तरीका है अपने पुराने दोस्तों को खोजने और उनसे जुड़े रहने का। पर लोगों ने तो इसका पूरा मतलब ही बादल दिया है, उनके फ्रेंड लिस्ट में हजार दो हजार से ज्यादा दोस्त होते है पर वे उनमें से बहुत कम को ही जानते है।

मुझे आज भी दोस्तों से इंटरनेट पर चैट करने से ज्यादा उनके साथ वक्त बिताना, बातें करना और मस्ती करना पसंद है। और ये एक ऐसा विषय है जिसके बारे में लिखने के लिए मेरे पास शब्द कम पर जाएंगे, शायद पूरा ब्लॉग कम पर जाए। काश वो दिन लौट आते, काश हम फिर से साथ होते!!! काश …….


1 thought on “फ्रेंड्शिप डे : यानी दोस्तों का दिन”

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