Amit Ranjan in Forest of Bandhawgarh

बांधवगढ़ के जंगलों के बारे में तो सब ने सुना होगा, मैंने भी सुना ही था। इसके बारे में विस्तार से जानना हो तो विकिपीडिया है ही। मैं तो बस यहाँ अपना अनुभव बाँटने आया हूँ।

अभी मैं दुर्गा पूजा की छुट्टियाँ ख़त्म कर के ऑफिस आया ही था की अचानक पता चला शंकर सर ने छः लोगो के साथ बांधवगढ़ का अचानक प्लान बना लिया। और उसी हफ्ते हमें निकलना था रोड ट्रिप पर।

शुक्रवार शाम में सफारी आ कर ऑफिस के गेट पर लग गया और हम निकल पड़े अपने सफ़र पर। शंकर सर ने मेक माय ट्रिप से मोगली रेसोर्ट को बुक कर रखा था।

अमित रंजन की बंधवगढ़ यात्रा

हमें लगा हम अब मज़े से पटना से बांधवगढ़ पहुँच जायेंगे और सबकुछ अच्छा जा रहा था की तभी हम पहुंचे उत्तर प्रदेश की सीमा में। और हमें पता चला यहाँ तो सड़क ही नही है और जो है वो गढ़े में है। रात भर हम रोलर कोस्टर की सवारी करते रहे जब तक उत्तर प्रदेश और हमारे अंग्रेजी वाले सफ़र का अंत न हुआ।

मोगली रेसोर्ट

लगभग डेढ़ बजे के आस पास हम पहुंचे मोगली रेसोर्ट, हमने चेक इन किया बिना किसी परेशानी के। वहां के मेनेजर मिस्टर इकबाल ने हमारा स्वागत किया और हमें हमारा कमरा सौपा बिलकुल साफ़ सुथरा। हमने थोरी देर पूल के पास वक्त गुज़ारा फिर खाना खाया और ढेर सारी तस्वीरें ली। हमने खूब मस्ती की और वहां हमने जो कहा वो व्यवस्था उन्होंने करवा दी बिना किसी परेशानी के।

amit ranjan and friends at pool side in mogli resort

अगले दिन सुबह हमें जाना था जंगल की सैर पर, और हमने एक छोटी सी गलती कर दी जिसकी वजह से सारे किये कराये पर पानी फिर जाता!

हमने उन्हें अपने प्लान के बारे में तो बताया था पर कन्फर्म नही किया की कब कैसे निकलना है। सुबह हम भी बड़े आराम से गए की हमें तो गाड़ी मिल ही जाएगी। पर असल दिकत गाड़ी की थी ही नही, परमिट की थी। खैर, मोगली वालों ने वो भी हमारे लिए किसी तरह करवा ही दिया, जिसके लिए हम सब उनके शुक्रगुज़ार थे।

amit-ranjan-friends-in-bandhavgarh

बंधवगढ़ जंगल की यात्रा

अब शुरु हुई हमारी जंगल यात्रा। अभी हम अंदर गए ही थे की हिरन, साम्भर, मोर, बन्दर दिखने सुरु हो गए थे। हमें लगा की हमारा दिन काफी अच्छा है और बाघ भी हमें जल्द ही दिखेगा। पर कुछ ही देर के बाद जब हम और अंदर गए तो हमें एहसास हुआ की जो जानवर हमने घुसते वक्त देखे थे अब तो वो भी नसीब नही हो रहे है। हम ज़ोन 2 में थे और वह किसी को भी बाघ के कोई निशान तक नही मिले।


Amit Ranjan & Friends on Morning Safari in Bandhavgarh

हम लोग एक कैंप में चाय नाश्ते के लिए रुके। अभी सबने नाश्ता सुरु ही किया था कि किसी ने बाघ देखे जाने की बात की वो भी ठीक बगल में। वो एक साम्भर या हिरन का शिकार कर चुका था। और हम उसके आखरी चीखों को काफी साफ सुन रहे थे। हम सब सफारी पर बैठ कर उसे देखने के लिए चले। सभी लोग साँसे थाम कर उसकी एक झलक देखना चाहते थे। तभी हमने उसके सर को झाड़ियों के पीछे से झांकते देखा। मानो वो कह रहा हो की मुझे अकेला छोर दो वरना अच्छा न होगा। हमने उसे पल भर के लिए ही देखा और हमारे रौंगटे खड़े हो गए। और इसी तरह हमारा जंगल का सफर समाप्त हो गया। हम इतने डर गए थे किसी को ये ध्यान नही आया की उसकी तस्वीर ले सके, वैसे लेता भी कैसे पल भर के लिए ही तो वो सामने आया था। इसीलिए सिर्फ सेलफ़ी से ही काम चलना पड़ा।

Amit Ranjan & Friends Watching Tiger Hunting in Bandhavgarh

हम वापस रेसोर्ट आ गए। कई लोगों ने बाघ को काफी नजदीक से देखा और काफी खुश थे। हम थोड़े खुश और थोड़े दुखी भी थे। ख़ुशी इस बात की थी की हमने बाघ को उसके प्राकृतिक इलाके में शिकार करते देखा जो काफी दुर्लभ नज़ारा होता है और दुखी इसलिए थे की उसे हमने नज़दीक से नही देखा और तो और हमने उसके चकर में किसी और जानवर को भी ठीक से देखने का मौका गवां बैठे। फिर वापस आ कर हमने खाना खाया और पैसे जमा कर के हमने रेसोर्ट और वहां के लोगों से फिर मिलने का वादा किया और अपने घर की ओर निकल पड़े। वहां के मैनेजर मिस्टर इक़बाल ने हमें खुद गेट तक चोर बिल दिया और विदा किया।

Amit Ranjan & Friends on Bridge over Son Bhadra River

अगर आप बांधवगढ़ जाने की सोच रहे है तो नीचे दिए गए बातों का खास ख्याल रखियेगा:

  • अपना रेसोर्ट चुनने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी लेना ना भूले। (मैं तो मोगली वालों से काफी खुश था और सभी को यहाँ जाने की सलाह दूंगा।)

  • डेबिट या क्रेडिट कार्ड के भरोसे न रहे। कई बार वहां नेटवर्क की प्रॉब्लम की वजह से कार्ड से पैसे जमा करना परेशानी का सबब हो सकता है। हमेशा पर्याप्त नकद साथ रखे।

  • अपने घूमने के प्लान के बारे में रेसोर्ट के मैनेजर से पूरी तरह बात कर के कन्फर्म कर दे।

  • अगर आप जंगल में गए और आपने कोई जानवर देखा तो उसे वक्त दीजिये, फोटो खिचिया, निहारिये, क्योकि वो जंगल है चिड़ियाघर नही। हो सकता है आपको बहोत काम जानवर देखने को मिले या बहोत ज्यादा। इस पर आपका बस नही।

  • चलते चलते एक और बात, जंगल मे सुबह के वक्त अच्छी ख़ासी ठंड होती है तो एकाद गरम कपड़े रखना न भूलिएगा।

उम्मीद करता हूँ की अगली बार जब हम वापस बंधवगढ़ जाएंगे, जो की जरूर जाएंगे, तो हमे बाघों के दर्शन काफी नजदीक से हो। आप लोग भी दुआ करिएगा।


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