Independence is a myth and we should know that

आजादी के लगभग ७० साल बीत गए, काफी कुछ बादल गया है। मैंने भी अपने जीवन में लगभग २५ साल आजादी की हवा में सांस जरूर ली है। बचपन के दिनों में इस दिन का एक अलग ही महत्व था। सुबह जल्दी उठ कर स्कूल के लिए तैयार होना, स्वतन्त्रता दिवस के लिए भाषण तैयार करना, स्कूल में सजावट के लिए फूल और अन्य सामग्री जुटाना। प्रधानाध्यापक का झंडा फहराने के बाद हम सबका राष्ट्रीय गीत गाना। वे दिन लाजवाब थे जो अब लौट कर नहीं आ सकते। उस वक्त हमें दुनियादारी से कोई मतलब जो नहीं था, धर्म जाती में भी बटे हुए हम न थे। क्या सही क्या गलत हमें कहाँ पता था, और न ही कभी इसकी चिन्ता थी।

Freedom is just a hallucination

आज जब अपने आस पास देखता हूँ तो पता चलता है की आजादी तो बस एक छलावा ही है। सभी के सभी गुलाम ही है आज भी, कोई रूढ़ि मानसिकता का तो कोई अपने घमंड का। जो जाती का गुलाम है तो कोई धर्म का। आज भी कोई अपने लिए फैसले नहीं कर सकता, आज भी कोई अपने मन का खाना या पीना नहीं ले सकता। कभी सरकार उसे इसकी इजाजत नहीं देते तो कभी घर वाले। कोई अपनी मर्जी से पढ़ाई के लिए विषय तक नहीं चुन सकता तो किसी को अपने लिए जीवनसाथी चुनने का हक भी नहीं है। आप क्या खाएंगे या क्या पीएंगे इसके लिए भी आप आजाद नहीं है।

सरहद पर हमारे जवान बाहरी खतरों से हमारी रक्षा के लिए दिन रात लड़ रहे है और यहाँ हम एक दूसरे का ही खून इस बात पर पीने को तैयार है की कौन क्या खाएगा और क्या पहनेगा, मंदिर बनेगा या मस्जिद, उसने ऐसा कैसे बोल दिया।

और कुछ लोग ऐसे भी है की आजादी के नाम पर अपने ही देश को कोश रहे है और इसके टुकड़े करने पर उतारू है। क्या देश को कोसने से कुछ होगा? कोसना है तो अपने आप को कोसो की तुम्हारी मानसिकता अभी भी गुलामी की ही है। तुम आज भी गुलाम ही हो और दूसरों को भी बना रहे हो। अपनी सोच को बदलो देश बदलेगा।

फिर से एक बार ये सवाल अपने आप से पुछ कर देखो। क्या सच में हम आजाद हो गए है?

अपने विचार हमें जरूर बताए।


Leave a Reply

%d bloggers like this: