Liquor Ban in Bihar

कुछ भी बोलने से पहले मैं ये बात साफ कर देना चाहता हूँ कि मैं किसी की यहाँ वकालत नहीं कर रहा और न ही किसी के अपमान का कोई इरादा है मेरा। मैं बस अपने विचार यहाँ व्यक्त कर रहा हूँ।

26 नवम्बर 2015, बिहार के मुख्य मंत्री श्री नितीश कुमार का एक फैसला आया बिहार में देशी शराब बंदी का, जो की उसके अगले साल 1 अप्रैल 2016 से लागू होना था। हमें भी ये फैसला काफी प्रभावशाली और बेहतरीन लगा। आए दिन अखबारों में नकली या देशी शराब पीने से लोगों की मौत की खबर पढ़ने को मिल ही जाती थी। और इस फैसले के बाद इन खबरों से छुटकारा भी मिल जाता।

देखते देखते वो दिन भी आ ही गया जिसका सबको इंतजार था। लेकिन यहाँ तो फैसले में एक और बड़ा बदलाव आ गया, जिसने काफी लोगों को सकते में डाल दिया। और वो फैसला था पूर्ण शराब बंदी का। इस फैसले की वजह से बिहार का हर व्यक्ति प्रभावित हुआ। अनुमान लगाया जा रहा था की ये फैसला एक क्रांतिकारी फैसला होगा जो की बिहार का नक्शा ही बादल देगा। और शायद ये हुआ भी, पर वो कहीं से भी मुझे सकारात्मक नहीं लगा।

आइये जानते है की पूर्ण शराब बंदी की वजह से बिहार को क्या क्षति हुई।

चलिये अब जानते है कुछ लोगों की तर्क के बारे में, जो मानते है की पूर्ण शराब बंदी होनी चाहिए।

  • बिहार के ग्रामीण जिलों में लोग अपने सारे पैसे शराब में उड़ा देते थे।
  • शराब पीने से लोग मर जाते है।
  • शराब पीने से लोग अपनी बीवियों को मरते थे।
  • शराब बुरी चीज़ है।

मानता हूँ की ऊपर दे गयी सारी बाते सही है पर क्या ये पूरा सच है। क्या इन्हें सुलझाने का ये सही फैसला था? क्या इसके लिए सरकार का ये कदम काफी था? मुझे नहीं लगता। ग्रामीण जिलों में सबसे ज्यादा बेची जाने वाली शराब होती थी देशी और नकली शराब जिसकी वजह से लोग मरते थे। और रही बात घरेलू हिंसा की तो उसके लिए आपको कानून पे पकड़ बनाने की जरूरत है और महिलाओं को आत्मनिर्भर। जब तक उन्हे एक पुरुष का साथ जीने के लिए अनिवार्य लगेगा तब तक वे शोषित होती रहेंगी। फिर चाहे वो घर के अंदर हो या बाहर। और रही बात शराब के बुरे होने की तो, अगर शराब बुरी चीज़ है तो मुझे नहीं लगता की दुनिया में कोई अच्छी चीज है खाने पीने के लिए।

“अति सर्वत्र वर्जयेत” अर्थात किसी भी चीज की अति अंततः नुकसानदायक साबित होती है, फिर चाहे वो शराब हो या पानी। और हमारे यहाँ एक कहावत भी होती थी की जब किसी की तबीयत खराब हो जाए तो उसका दावा दारू करवाना चाहिए।

चलिये अब जानते है शराब पीने के कुछ फायदे।

और भी ना जाने कितने ही फायदे है इसके।

* फिर भी, शराब के स्वास्थ्य लाभों के बारे में कोई सबूत नहीं है, और शराब पीने वाले हर व्यक्ति को लाभ नहीं हो सकता है।

अब सरकार ने जो कानून बनाए थे उसके अनुसार अगर आपके घर में कोई भी शराब पीते पकड़ा गया तो पूरे परिवार को 10 साल के लिए जेल, और उसके घर को जब्त कर लिया जाएगा और 10 लाख रूपय तक का जुर्माना। ऐसा कानून बनाने वाले की मानसिक स्थिति मैंने समझने की बहुत कोशिश की पर मैं नाकाम रहा। मेरी नज़र में सरकार का ये अब तक का सबसे बेहतरीन फैसला होते होते रह गया। बिहार को इसकी चाहत तो कभी न थी, सरकार के पास कई ऐसे काम थे जिन्हें अगर वो सही तरीके से करतीं तो इसकी नौबत ही नहीं आती। अब जब हमारे मुख्य मंत्री श्री नितीश कुमार जी भाजपा से वापस जुड़े है तो मुझे उम्मीद है की बिहार को वो सब मिलेगा जिसकी इसे सख्त जरूरत है।

मैं एक बार फिर से ये साफ कर देना चाहता हूँ के ये मेरे निजी विचार है और मेरा किसी का अपमान करने का कोई इरादा नहीं है, कृपया अपने विचार मुझे जरूर बताए।


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