दार्जिलिंग यात्रा : एक अनोखा और रोमांचक सफर – अध्याय २

दार्जिलिंग, पहाड़ों पर बसा एक स्वर्ग जैसा सहर जहां की हवा में एक अनोखा और अद्भुत नशा सा था। मैंने ज्यादा पहाड़ या ज्यादा हिल स्टेशन नहीं देखे है बल्कि ये मेरा पहला अनुभव था पहाड़ों पर। चारों ओर हरियाली ही हरियाली थी। प्रकृति का ये अद्भुत नज़ारा मैं अपनी आंखों से देख रहा था। एक पल के लिए लगता था की ये सब एक सपना है और मैं कोई पुरानी फिल्म देख रहा हूँ जिसे पहाड़ों पर फ़िलमाया गया हो।

Amit Ranjan near St. Paul Schoolहमारी गाड़ी दार्जिलिंग शहर में आ चुकी थी और एक गाइड हमारी गाड़ी पर ऐसे कूद पड़ा मानो किसी भूखे जानवर को खाना मिल गया हो। जब तक हमने गाड़ी नहीं रोकी वह हमारी गाड़ी से लटका ही रहा। उसने हमें एक सस्ता सा होटल दिलवाया और दार्जिलिंग घूमने का भी जिम्मा उसी ने ले लिया। हमें भी एक गाइड की जरूरत तो थी ही, सो हमने उसे अपने गाइड के तौर पर रख लिया। उसका नाम भी अमित था। हम लोग ने होटल में मुंह हाथ धोये, नहाया और तैयार होकर दार्जिलिंग घूमने निकाल गए। सबसे पहले हम वहाँ के चिड़ियाघर गए। हालांकि हम अंदर नहीं गए, क्योंकि वक्त हमारे पास कम था और घूमना हम पूरा दार्जिलिंग चाहते थे। फिर हम St. Paul’s School गए जहां मेरा नाम जोकर का पहला ऋषि कपूर वाला भाग, मैं हूँ ना और यारियाँ को फ़िलमाया गया था। वह हम रस्सी वाले झूले (Rope-Way) पर चढ़े और वहाँ से जो नजारा हमने देखा उसे बयान करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है। काश मैं कोई कवि होता तो शायद कोई कविता लिख डालता उस नजारे पर। नीचे से घाटी का नज़ारा और भी खूबसूरत था, हम वह एक छोटी सी दुकान पर कुछ देर बैठे, फोटो खिचवाई और घाटी के नजारे का लुत्फ उठा कर वापस उससी रस्सी वाले झूले से ऊपर चले गए। फिर हमने चाय के बाग़ देखे और वही से सब ने चाय पत्ती भी खरीदी। मैंने भी दो तीन पैकेट घर के लिए ले लिये। अँधेरा होने ही वाला था इसलिए हम होटल वापस आ गए।

घूमने के चक्कर में हमसे एक बड़ी गलती ये हो गयी की हमने अपनी गाड़ी उस गाइड को पूरी तरीके से सौंप दी थी और अपने ड्राईवर को हम होटल पर छोड़ आए थे क्योंकि गाड़ी में जगह ही नहीं बची थी। और उसका नतीजा ये हुआ की उस गाइड ने हमारे गाड़ी से स्पीकर ही गायब कर दिया था। और इस घटना ने हम सभी की नींद ही उड़ा दी थी। काफी देर तक हमने उसे ढूंढा उसे फोन लगाया, पर कोई फायदा नहीं हुआ। अब सर पटकने से कुछ नहीं होने वाला इतना तो हमें समझ आ ही चुका था। हमने रात भर Dumb Charades खेला और फिर सुबह टाइगर हिल के लिये निकाल पड़े हालांकि हमें काफी देर हो चुकी थी वह के लिये। और वहाँ के लोगों से भी हमें पता चला की टाइगर हिल अब तक बंद हो चुका होगा और बारिश के मौसम की वजह से शायद वह जाने पर हमें कोई फायदा भी नहीं होगा।

All Crew in Mirik Lakeफिर हम मिरीक के लिये निकाल पड़े। हमने वहाँ सुमेंदु झील देखी पर वहाँ कोहरे की वजह से हम नाव पर घूमने नहीं जा सके। हमने घोड़ों पर बैठ कर फोटो खिचवाई, मछलियों को दाना खिलाया और फिर हम आगे निकाल पड़े। हम इस बार दूसरे रास्ते से लौट रहे थे। रास्ते में हम पशुपति नाथ के बार्डर से होते हुए निकले और रास्ते में तीस्ता नदी पर एक घंटे तक रुके। पहाड़ों के बीच से चट्टानों पर बहती हुई ये नदी दिल और आँखों को काफी सुकून पहुंचा रही थी।

Amit Ranjan near Tisita Riverयह सफर मेरी जिंदगी का अब तक का सबसे बेहतरीन, रोमांचक और यादगार सफर था। हमने इस सफर में बहुत कुछ देखा और बहुत कुछ सीखा। हमसे कुछ चूक भी हुई जिसका खामियाजा भी हमें भुगतना पड़ा। इस सफर ने मुझे और भी सफर पर जाने के लिए प्रेरित किया है। अभी भी बहुत कुछ बाकी है जिसे देखना है, जैसे बर्फ में ढाका दार्जिलिंग, टाइगर हिल, चिड़ियाघर जिसे मैं अगली बार पूरा करूंगा। मुझे उम्मीद है की मैं और भी कुछ बेहतरीन जगहों पर घूमने जाऊंगा। कब ये मुझे अभी नहीं पता पर जल्द ही।

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Team Lead at RepuGen Web Team
Amit Ranjan is a boy from Sitamarhi. He loves traveling, photography, sketching, cooking and sharing life experiences. By profession, he is a digital marketer working as a Team Lead in RepuGen Web team and helps small business to grow online in their local areas.

Amit Ranjan

Amit Ranjan is a boy from Sitamarhi. He loves traveling, photography, sketching, cooking and sharing life experiences. By profession, he is a digital marketer working as a Team Lead in RepuGen Web team and helps small business to grow online in their local areas.

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