एक झरने के सौन्दर्य में डूबा हुआ गोवा में हमारा तीसरा दिन

आज गोवा में हमारा तीसरा दिन था। हम लोग काफी उत्साहित थे, क्योंकि आज जहां हमें जाना था वह एक काफी जाना माना झरना था और इसे हमने सिर्फ फिल्मों में ही देखा था। आज हमें इस झरने को सामने से देखने का मौका मिला था। ये गोवा और कर्नाटक की सीमा पर मौजूद है, तो हमें पता था की आज पूरा दिन हमारा यही जाने वाला है। मैं और बिपलव, दोनों सुबह 9 बजे तक तैयार हो चुके थे।

Dudhsagar Waterfall

हमने अपने मोबाइल फोन के GPS में जगह डाला, अपनी सवारी ली फिर निकाल पड़े अपने मंज़िल की तरफ। मडगाओ पार करते ही मैंने बिपलव को गाड़ी चलाने के लिए दे दी। रास्ता बिलकुल साफ था और सीधा दिख रहा था। थोड़ी घबराहट तो थी मुझे, क्योंकि बिपलव काफी नया था गाड़ी चलाने के मामले में। और उसने एक बार गाड़ी गिरा भी दी थी। पर फिर भी थोड़ा रोमांच तो बनता ही था। और वैसे भी गाओ में बुलेट चलाने का मज़ा मैं उससे छिनना नहीं चाहता था।

जो रास्ते नक्शे पर सीधे दिखते हो वह असल में काफी उतार चढ़ाव वाले हो सकते है। हमने लगभग 56 किलोमीटर का सफर लगभग 2 घंटे में किया और सही सलामत पहुँच भी गए। बिपलव को देखते ही पता चल रहा था की उसे कितना मज़ा आया था खुद गाड़ी चला कर यहाँ तक आने में। हमने अपनी गाड़ी वहाँ एक नारियल पानी बेचने वाले के घर में 30 रूपय में लगा दी।

Bike parked in a house of Coconut Seller

अब वक्त था उस जगह जाने का। लेकिन वहाँ जाने के लिए हमें लगभग 1 घंटे कतार में खड़े हो कर गाड़ी की टिकट लेनी पड़ी। 2800 रूपय किराए पर हमने एक पूरी गाड़ी ली, जिसका नंबर था WL205। लेकिन अगर आप यहाँ जा रहे है तो आपको एक लाइफ जैकेट 30 रूपय के किराए पर लेना होता है। इसलिए हमने लाइफ जैकेट भी किराए पर ली और फिर उस WL205 नंबर की गाड़ी पर सवार हो कर निकाल पड़े। हमने दो पथरीली नदियों और एक दो पुलियों को पार किया। फिर हम भगवान महावीर अभ्यारण्य (Bhagwan Mahaveer Sanctuary) एवं मोललेम राष्ट्रीय उद्यान (Mollem National Park) के रास्ते उस जगह के नजदीक पहुंचे। अभी भी हमें कुछ दूर पैदल चलना था। रास्ते में हमने एक देवी का मंदिर भी देखा जो उस जंगल में मौजूद था।

Reaching at Dudhsagar Waterfall

कुछ दूर पैदल चलने के बाद आखिर हम उस झरने के पास पहुँच ही चुके थे जिसका नाम था दूध सागर। अपने नाम को सार्थक करता हुआ वह झरना ऐसा लग रहा था मानो पानी की जगह दूध ने ले ली। इस झरने के पानी इतना ठंडा था मानो अभी हमारी कुल्फी जमा दे। और साफ इतना की इसे बस यूं ही पी जाओ और लगेगा की तुमने कोई पानी की ठंडी बोतल खरीद कर पी हो। हमारे गाड़ी के चालक ने हमें डेढ़ घंटे का वक्त दिया था घूम कर आने को और बताया था की उससे अधिक होने पर 200 रूपय जुर्माना देना पड़ता है हर गाड़ी को। दरअसल हर गाड़ी के अंदर जाने और बाहर आने का वक्त तय है। जो गाड़ी जीतने लोगों को ले कर गयी है वह उतने ही लोग को ले कर एक तय समय में वापस आती है। देर होने पर उन्हें 200 रूपय का जुर्माना देना पड़ता है।

झरने के ठीक नीचे तालाब जैसा बना हुआ था जिसमें सभी तैर रहे थे और वह तालाब काफी गहरा था। पर लाइफ जैकेट की वजह से कोई भी वहाँ डूब नहीं सकता था। बचाव दल भी वहाँ मुस्तैदी से सभी पर नज़र रखे हुई थी। बिपलव को पहले ही पानी से एक झटका लग चुका था, तो उसे काफी डर लग रहा था। शंकर सर पहले गए और जाते वक्त ही उनका पैर पत्थरों पर फिसल गया और वह काफी ज़ोर से गिरे। भाग्यवश उन्हें ज्यादा चोट नहीं आई और वे हमें थोड़ी ही देर में पानी में तैरते दिखे। फिर मैं और बिपलव भी पानी में उतर गए। परों के नीचे कुछ भी नहीं था और हम पानी में उस जैकेट के वजह से तैर रहे थे। फिर मैंने वहाँ अपने पैरो के पास काफी बड़ी मछलियां देखी। हम किनारे से तैर कर झरने के पास जाते और फिर किनारे आ जाते। मैंने झरने के पास ही एक पत्थर पर इंद्रधनुष भी देखा। मैंने आज तक इतनी नजदीक इंद्रधनुष नहीं देखा था। मैं उसे छु सकता था। हम उस ठंडे पानी में बस तैरते रहे तैरते रहे और दो घंटे कैसे बीत गए पता ही नहीं चला। पानी से निकलते वक्त मैं और बिपलव दोनों ही पत्थर पर फिसल गए और दोनों को हल्की चोट आई। वैसे ठंडे पानी में तैरने की वजह से हाथ लगभग सुन्न पर गया था इसलिए मुझे ज्यादा चोट पता ही नहीं चला।

People at Dudhsagar Fall

काफी शाम हो चुकी थी, हम अपनी गाड़ी में बैठ कर वापस लौट आए। भूख भी लगी थी तो हमने वही एक रैस्टौरेंट में खाना खाया। फिर अपनी बुलेट हमने ली और वापस घर की ओर चल दिये। हमारा ये दिन भी काफी बेहतरीन रहा था।

अगर आप दूध सागर जाने की सोच रहे है तो कुछ बातों का खास ध्यान रखे:

  1. जितनी जल्दी हो सके वहाँ पहुँचने की कोशिश करें। क्योंकि 4 बजे के बाद गाड़ियाँ झरने की तरफ नहीं जाती और कतार इतनी लंबी होती है की आप जितनी देर वहाँ पहुँचने में लगाएंगे आपको शायद उतनी ही लंबी कतार का सामना करना पड़ेगा।
  2. अपने साथ तौलिये और कपड़े ले जाना न भूले। वहाँ का बाज़ार काफी महंगा होता है और मोल भाव भी बहुत होता है तो कोशिश करें की ख़रीदारी वहाँ न ही करें तो अच्छा है।
  3. बिना लाइफ जैकेट के पानी में उतारने का सोचिएगा भी नहीं, भले ही आपको तैरना आता हो।
  4. वहाँ के लोगों के हिसाब से जो सबसे बढ़िया रैस्टौरेंट था उसका खाना और सर्विस बहुत ही बकवास था। तो कोशिश करिए की अपना एक वक्त का खाना अगर आप ले जा सके तो अपने साथ ले जाइए।
  5. सबसे जरूरी और महत्वपूर्ण बात, अगर आप पानी का बोतल या खाने का समान झरने के पास ले जा रहे है तो कृपया उसे वह इधर उधर न फेंके। या तो उसे अपने साथ ले आए या फिर वहाँ बनाए कूड़ेदान में ही डाले।
  6. और बंदरों को ना खिलाये। ये एक दंडनिए अपराध है। यकीन नहीं आता तो नीचे दिये गए तस्वीर को गौर से देखिये।

Dont feed Monkeys

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Amit Ranjan is a boy from Sitamarhi. He loves traveling, photography, sketching, cooking and sharing life experiences. By profession, he is a digital marketer working as a Team Lead in RepuGen Web team and helps small business to grow online in their local areas.

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