गोवा की एक यादगार और बेहतरीन सफ़र – भाग 1

गोवा हिंदुस्तान का एक ऐसा राज्य है जहां दुनिया भर के पर्यटक खुद ब खुद खिचे चले आते है। और मेरे जैसे लगभग हर लड़कों का तो सपना भी होता है गोवा जाने का। और कई अपने सपनों को पूरा भी कर लेते है जैसे पिछले साल के अंत होने से पहले मैंने किया।

जब कहीं घूमने की योजना बनती है तो कई लोग आपके साथ होते है पर वक्त नजदीक आने पर पता चलता है की वाकई में कितने जाने वाले है और कितने अफसोस जताने वाले।

Group Travel Plan

तो हमने भी गोवा का प्लान बड़ी धूम धाम से बनाया। ढाई तीन महीने पहले से ही तैयारियां शुरू हो चुकी थी। प्लान भी बनाया तो बिलकुल ऐसे वक्त का जब गोवा सबसे ज्यादा महंगा और भीड़ भाड़ वाला होता है। खैर बना तो लिया और पैसे भी देखने थे की ज्यादा खर्च न हो। शुरू में हम छः सात लोग थे फिर धीरे धीरे हम तीन ही लोग बचे।

मैं और सरकार (बिपलव) दोनों ने ट्रेन की टिकट पटना से वास्को की दो महीने पहले ही ले ली थी। पर हमारा प्लान थोड़ा आगे पीछे बना था सो सीट एक जगह नहीं हो पायी थी, पर कोच एक ही था। फिर हमने Airbnb और Guesthouser से अपने लिए गोवा में घर ठीक करने की कोशिश की। हमारा प्लान 3 दिन साउथ गोवा और 3 दिन नॉर्थ गोवा घूमने का था। सो हमने दोनों जगह बूकिंग की। काफी मशक्कत के बाद हमने Airbnb से दोनों जगह घर ठीक कर ही लिया।

Train from Patna to Goa

और आखिरकार वो दिन आ ही गया जब हम अपने गोवा के पहले सफर पर रवाना होने वाले थे, 24 Dec 2016, हमारी ट्रेन भी बिलकुल अपने वक्त पर थी। इस वक्त अगर आपको ट्रेन की भीड़भाड़ से बचना है तो AC की टिकट ही करवाइए क्योंकि स्लीपर में काफी भीड़ होती है। ट्रेन पर सवार होते ही हमने देखा की कोई चार्जिंग पॉइंट्स काम नहीं कर रहे थे। इसलिए मैंने इंडियन रेल्वे को इसकी जानकारी ट्वीटर की मदद से दे दी थी। और मैंने देखा की इसका जवाब भी जल्द ही आ गया और मुगलसराय में सारे चार्जिंग पॉइंट्स ठीक कर दिये गए। इसके लिए हम इंडियन रेल्वे का बहुत शुक्रगुजार है। लगभग दो दिन का सफर और आपका फोन बंद, सोच के ही डर लगता है।

एक सज्जन व्यक्ति की वजह से मेरा और सरकार का सीट एक जगह हो गया था। हमने अपनी सीट उनके साथ बादल ली थी। पहला दिन तो जैसे तैसे कट गया। हमारे साथ एक और लड़कों का ग्रुप गोवा छुट्टियाँ मनाने जा रहा था। अगले दिन सुबह उनसे बातचीत शुरू हुई और ताश के पत्ते खुले, फिर क्या था वक्त कैसे कटा पता ही नहीं चला। उनमें से एक संगीतकार भी था और गिटार बजता था, हमारे कहने पर उसने गिटार निकाल और फिर हमारा सफर और भी मजेदार हो गया। हमारा दूसरा दिन भी निकाल चुका था। तीसरे दिन सुबह हमने एक दूसरे को मडगाओ स्टेशन पर अलविदा कहा और फिर अपने तत्काल निवास के लिए बेतलबतीम की और निकाल पड़े।

Meet awesome guys

गोवा में हमारा पहला दिन

First day in Goaहमने अपने घर के मालिक से बात की फिर एक ऑटो रिक्शा किया और GPS की मदद से अपने गोवा वाले अस्थायी निवास पर पहुंचे। यहाँ के ऑटो रिक्शा हमारे यहाँ यानी पटना के ऑटो रिक्शा से बिलकुल अलग थे। दोनों तरफ से दरवाजे और ड्राईवर सीट के पीछे पर्दे।

हमारे मकान मालिक ने हमारा स्वागत किया और एक बेहतरीन और साफ़ सुथरा घर हमें 3 दिनों के लिए सौंप दिया। अब हमें बस घूमने के लिए एक सवारी की जरूरत थी। गोवा में भाड़े पर आप बाइक या कार ले सकते है। हमने ऑनलाइन देखा आसपास पता किया तो पता चला की pulsar और active दोनों ही 600 प्रति दिन पर मिल रहे है। फिर हमने शंकर सर को याद किया उनके एक गोवा के मित्र (Mr. Bonny) ने हमें उनके कहने पर 7 दिनों के लिए अपनी निजी बुलेट हमें घूमने के लिए दे दी। जिसके लिए हम, दोनों के काफी आभारी है।

Amit Ranjan on Betalbatim Beach

उस दिन हमने कई तटों को देखा जैसे:

  • बेतलबतीम तट (Betalbatim Beach)
  • कोलवा तट (Colva Beach)
  • बेनौलिम तट (Benaulim Beach)
  • कवालोस्सिम तट (Cavelossim Beach)
  • बेतुल तट (Betul Beach)
  • सनसेट तट (Sunset Beach)

सनसेट तट के पास ही Martins Corner भी है, इसका नाम हमने बहुत सुना था। सोचा कुछ नया यहाँ खाया जाए, इस लिए हमने Prawn Curry with Rice और एक 60 old monk ऑर्डर की। जैसा सुना था वैसा ही पाया, बेहतरीन सर्विस और बेहतरीन स्वाद के साथ साथ बेहतरीन लाइव शो।

Amit Ranjan - Biplav - in Martins Corner

** यहाँ पेट्रोल और दारू काफी सस्ते है। इसीलिए हमने एक गाड़ी के लिए और दूसरा अपने लिए लिया और फिर घर लौट आए।

गोवा में हमारा दूसरा दिन

आज हमने अगोण्डा और पालोलेम का रोड ट्रिप प्लान किया था। हमने अपनी शान की सवारी बुलेट (Royal Enfield) उठाई और निकाल पड़े एक सुहाने सफर पर। और इस रोड ट्रिप के अनुभव के लिए मेरे पास शब्द नहीं है। हमने अगोण्डा में खूब मस्ती की, बेचारे सरकार तो डूबते डूबते बचे। अगर आपको तैरना नहीं आता, जो की मुझे भी नहीं आता, तो कभी भी पानी में ज्यादा दूर नहीं जाना चाहिए। जैसे ही पानी कंधे से ऊपर हो रुक जाइए। अब पीछे हो लेने में ही भलाई है क्योंकि समुंदर कब आपको खिच ले कोई ठीक नहीं है। वहाँ हमने दोपहर का खाना खाया और फिर पालोलेम की और निकाल पड़े।

ये तट बाकी तटों से काफी अलग था, अभी तक जीतने भी समुंदरी तटों को हमने देखा था वो बिलकुल ही शांत और विदेशियों से भरा था पर यहाँ तो माहौल ही कुछ और था। ये तो बाज़ार था और यहाँ भारतीयों की संख्या अधिक थी। काफी चहल पहल और शोर शराबे वाला तट था ये। फिर हमने 1200 में एक नाव की और डॉल्फ़िन्स देखि, फिर मंकी द्वीप (monkey island), बटरफ्लाइ द्वीप (butterfly island) और हनीमून द्वीप (honeymoon island)। ये सारे द्वीप मुझे कुछ खास नहीं लगे पर डोल्फींस देख कर सारे पैसे वसूल हो गए। यहाँ हमें पहली बार पार्किंग के पैसे देने पड़े थे।

तीसरे दिन का सफर और भी मज़ेदार होने वाला था, क्योंकि हमारे तीसरे दिन का गंतव्य स्थान था दूध सागर।

हमने जीतने भी तट अब तक देखे उनमें से बेतलबतीम, अगोण्डा, कोलवा और बेनौलिम बेहतरीन थे। यहाँ की जमीन समतल, रेत सफ़ेद और बिलकुल साफ थे। काफी बड़ी लहरें और बिकनी में खूबसूरत लड़कियां। किसी को और क्या चाहिए।

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