स्वतंत्रता दिवस की जलेबी और बारिश

14 अगस्त 2014 का दिन, यानी हिंदुस्तान के स्वतंत्रता दिवस के ठीक एक दिन पहले। मुझे उस रात सीतामढ़ि के लिए निकालना था। ऑफिस में तीन दिन की छुट्टी थी, 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस की छुट्टी तो थी ही साथ में शनिवार और रविवार छुट्टी भी तो थी। मुझे घर गए हुए 3 महीने से ऊपर हो चुके थे।

Enjoying Rain In Patna

उस दिन पटना का मौसम भी मस्ताना हो चुका था, मुझे इस बात की चिन्ता थी की मैं आज घर जा भी पाऊँगा या नहीं। और इसकी सिर्फ और सिर्फ एक ही वजह थी पटना का मौसम। उस दिन जम के बारिश हो रही थी। मैं किसी तरह बरसाती पहन कर ऑफिस पहुँच चुका था। बाकी लोग भी किसी तरह ऑफिस पहुंचे। मौसम का मिज़ाज तो सुहाना था ही और इसी वजह से ऑफिस के कुछ लोगों को जलेबी खाने का मन भी हो गया था।

हमारे यहाँ लोग जलेबी को और किसी दिन पूछे या नहीं पर गणतन्त्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जरूर पूछते है। और आज लोगों को दो बहाने मिल गए थे एक तो बारिश और दूसरा आजादी के दिन की छुट्टी से पहले सभी का एक साथ जलेबी खाने का ये मौका। फिर क्या था मैं और मेरे ऑफिस के तीन और लोग अंकेश, गोपाल जी और चेतन जी निकाल पड़े 11:30 में जलेबी लाने। एक तो चारों तरफ पानी ही पानी और फिर बारिश भी काफी तेज हो रही थी। काफी खोजने के बाद हमें एक जगह जलेबी मिल ही गयी। मैंने बारिश का खूब मजा लिया, सड़कों पर घुटने से ऊपर पानी लगा हुआ था। ऐसा लग रहा था मानो पटना में बाढ़ आ गयी हो। हम जलेबी लेकर ऑफिस तो आ गए थे पर जलेबी बंद होने की वजह से काफी मुलायम हो गयी थी। फिर भी हम लोगों ने उस बारिश में नर्म जलेबी का लुत्फ उठाया।

शाम को वक्त हो चुका था मेरे घर लौटने का, और आज ऑफिस से कुछ लोग रात की ट्रेन से घूमने के लिए निकलने वाले थे। और मुझे भी बाद में पता चला की जिस ट्रेन से मैं हाजीपुर से दरभंगा होकर घर जाने की सोच रहा हूँ वह ट्रेन तो उस दिन थी ही नहीं। और तो और मेरे ऑफिस के दोस्तों की भी ट्रेन 11 घंटे देर से जाने वाली थी। तब मैंने रात की 1 बजे वाली बस में अपना टिकट कटवाया और फिर रेलवे स्टेशन आ कर सभी ऑफिस के दोस्तों के साथ मैंने कुछ बेहतरीन लमहे गुजारे। और 12 बजे के आस पास मैंने सभी को उनकी यात्रा के लिए शुभकामनाएँ दी और अपने यात्रा की शुभकामना ले कर सबसे विदा लिया।

15 अगस्त 2014, आज मैं सीतामढ़ी यानी अपने घर आ चुका था। यहाँ भी खूब बारिश हुई थी। और माँ ने मेरे लिए छोले भटूरे भी बनाए थे। और जैसा की मैंने कहा था की हमारे यहाँ लोग जलेबी को और किसी दिन पूछे या नहीं पर गणतन्त्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जरूर पूछते है, माँ को भी आज जलेबी खाने का मन था। मेरे एक दोस्त को खबर लगी की मैं घर आ गया हूँ तो वो मुझसे मिलने आ रहा था। सो मैंने उसे ही जलेबी लाने का काम भी दे दिया। जब वह जलेबी ले कर आया तब हम सब ने मिल कर जलेबी का लुत्फ उठाया। और स्वतंत्रता दिवस हमने मिल कर परिवार के साथ खाते पीते मनाया।

हमने कोई देशभक्ति के गीत नहीं गए और न ही कोई देशभक्ति की फिल्म साथ बैठ कर देखी। मेरे लिए तो बस यही काफी था की मैं घर पर अपने माँ के साथ था और सोने पर सुहागा तब हो गया जब मेरा सबसे अच्छा दोस्त भी मुझसे मिलने आ गया। उस रात वह मेरे घर पर ही रुका और हम लोगों ने रात भर पार्टी की, गप्पें मरीं और फिर सो गए।

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Team Lead at RepuGen Web Team
Amit Ranjan is a boy from Sitamarhi. He loves traveling, photography, sketching, cooking and sharing life experiences. By profession, he is a digital marketer working as a Team Lead in RepuGen Web team and helps small business to grow online in their local areas.

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