इंसानियत रो रही है।

A Crying Ladyक्या कह कर बुलाऊँ तुझे?
अल्लाह, भगवान, ईसा या नानक?
जो भी है तू, जैसा भी है तू
आकृत या निराकार
कहाँ खो गया है तू? क्यों सो गया है तू?

तेरे ही दर पे एक मासूम के टुकड़े हुए
उसके अंग-अंग के चीथड़े हुए
चीखीं तो होगी वो एक बार,
तुझसे दया की भीख तो मांगी होगी
फ़िर भी न जागा तू, फ़िर भी न आया तू
क्या इतना खोखला हो गया है तेरा बनाया इंसान?
क्या यही दशा होनी थी तेरे आविष्कार की?

अरे कब तक सोएगा आखिर?
कब तक आंखें मूंदे रखेगा तू?
इंसान तो बना दिया तूने
पर इन्हें इंसानियत कौन सिखाएगा?
कब करेगा इंसाफ तू? कब ये अत्याचार बंद करेगा?
आख़िर कब तेरा क्रोध जागेगा?

क्या उस मासूम की चीत्कारों से भी तुझे फ़र्क़ न पड़ा कोई?
क्या उसकी भारी सांसों से परेशान न हुआ तू?
नोचते रहे दरिंदे उसे रात दिन
और तू वहीं सामने सो रहा था
बिलकते हुए जान की भीख मांगी होगी उसने
अपनी आंखों से सचमुच का शैतान देखा होगा
रूह कांपती होगी उसकी जब भी उसके शरीर को कोई छूता होगा
बेहोशी में भी उसका दिल रोता होगा

और तू, सब का रखवाला, सब का पालनहारा
मूक बैठा सारा तमाशा देख रहा था
या तो ये तमाशा बंद कर, या इस दुनिया का अंत कर
अगर सही में है तू कही, तो कुछ तो शर्म कर
अब भी वक़्त है, संघार कर पापियों का
मौन तोड़ कर सब के प्राण हर
देख ये तेरी बनाई दुनिया कैसे इतना कुछ होने के बाद भी चैन से सो रही है
तेरी बनाई ये इंसानियत आज रो रही है।

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Ankesh Shrivastava
Ankesh Shrivastava
Project Manager at GMR Web Team
Ankesh Kr. Shrivastava is a manager at DigiNekt and a Project Manager at GMR Web Team. He loves to write poetry on the experiences of his life. He also passionate about photography and traveling, but by profession, he is a digital marketer.

Ankesh Shrivastava

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