SC/ST Act – कीचड़ का फूल आज मैला हो गया

कीचड़ में खिलने वाला साफ फूल भी आज मैला हो ही गया। जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ कमल की।

अब इसके पहले की किसी की आन बान और शान पे बन आए मैं ये साफ कर देना चाहता हूँ की मेरा इरादा किसी को भी ठेस पहुंचाने का नहीं है। और न ही मैं किसी खास पार्टी या समुदाय की यहाँ वकालत कर रहा हूँ।

Lotus

कितनी उम्मीदें जुड़ी थी लोगों की इस चिन्ह से। हमें लगा था कोई तो है जो जाती धर्म से ऊपर उठ कर देश के लिए सोचेगा। आज पता चला सब सिर्फ कोरी बकवास ही थी और कुछ नहीं। ये देश भेड़िये ही चलाते आ रहे है और भेड़िये ही चलाते रहेंगे।

चुनाव आने वाले है और इसीलिए अब ये जाती वाला घिनौना खेल फिर से शुरू हो गया। हर बार की भाँति इस बार भी। कुछ नया नहीं है। जाती के नाम पे आरक्षण दे कर समानता लाने के ख्वाब देखने वाले मूर्ख ही थे और वो लोग जो उनकी बात पर आँख बंद कर के भरोसा कर लिए वे महा मूर्ख। आरक्षण देश को बांटने के अलावा और कुछ नहीं कर रहा ये किसी को दिखता क्यूँ नहीं। बचपन में तो हमें पता भी नहीं था की जो हमारे साथ खा रहा है, खेल रहा है, पढ़ रहा है वो किस जाती का है या किस धर्म का। फिर हम बड़े होते गए और लोगों ने बताया की हम किसी जाती के है और दूसरे किस जाती के। हम किस धर्म के है और दूसरे किस धर्म के। फिर भी कोई फर्क न पड़ा क्योंकि हम दोस्त थे, साथी थे और अपनी ही धुन में अपने भविष्य को बनाने में जुटे थे।

फिर हमने स्कूल छोड़ कॉलेज में कदम रखा तब लगा हमें पहला झटका आरक्षण का। तब पता चला की कौन चोटी जात है और कौन बड़ी जात। और चलो ये वक्त भी निकाल गया। लेकिन अब लगा सबसे बड़ा झटका क्योंकि आपने तो देश बदलने की सोची थी। सोचा था सरकारी नौकरी करेंगे, घुस बंद करेंगे, अपना काम वक्त पे करेंगे, फलाना ढिमकाना और लाइफ सेट। तब लगा दूसरा सबसे बड़ा झटका और आपको दिखाई गयी आपकी औकात। जनरल (स्वर्णिम वर्ग) से हो, ओहह सोचा भी कैसे तुमने इतना कुछ हम सिर्फ अपंग लोगों (जिन्हें आरक्षण नामक बैसाखी की जरूरत है) को ही सरकारी नौकरी देते है। अगर तुम्हें चाहिए तो अपनी गांड रगड़ो कुछ को तो दे ही देंगे। और सरकारी किसी भी जगह की हालत क्या है ये तो सभी जानते ही है।

आज आलम ये है की कल तक जो दोस्त हुआ करते थे आज आरक्षण की वजह से एक दूसरे से जलते है और बात तक नहीं करते। कोई जनरल अपने आस पास किसी SC/ST या OBC को बैठाना पसंद नहीं करता। क्योंकि उसे पता है उसे सरकारी नौकरी में पास होने के लिए जितना ज्यादा नंबर लाना हो कम ही पड़ेगा पर उसका दोस्त जो की SC/ST/OBC है उनसे से ही थोड़ा बहुत सीख कर देश की नईया डुबोने बैठ जाएगा।

समानता आरक्षण से नहीं समान अधिकार देने से आएगी, समान अवसर प्रदान करने से आएगी, समान कानून बनाने से आएगी। दहेज प्रथा कानून का किस प्रकार दुरुपयोग हुआ ये किसी से छुपा हुआ नहीं है, SC/ST act वाले कानून का भी दुरुपयोग लोगों ने देखा ही है। किसी भी कानून को लागू करने से पहले अगर सरकार किसी व्यक्ति या जाती विशेष को ध्यान में न रख कर पूरे देश और समाज के बारे में सोचे तो शायद कुछ उम्मीद है। आरक्षण देना ही है तो उन्हें दो जिन्हें इसकी जरूरत है, जो आर्थिक रूप से पिछड़े है लेकिन इसके काबिल भी है। सामान अवसर सब के लिए, बस और कुछ नहीं चाहिए इस देश को। भारत माँ की हालत इस आरक्षण नमक बेड़ियों से और खराब होती जा रही है। उनकी रक्षा करो। कुछ तो देश के लिए करो।

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Team Lead at RepuGen Web Team
Amit Ranjan is a boy from Sitamarhi. He loves traveling, photography, sketching, cooking and sharing life experiences. By profession, he is a digital marketer working as a Team Lead in RepuGen Web team and helps small business to grow online in their local areas.

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2 Comments

  • आपके विचार बहुत अच्छे लगे। जातिगत राजनीती तो पुरानी बात है, चुनाव के वक़्त ये अधिक दिखता है। आरक्षण को दस साल बंद करके तो देखे सरकार।

  • It’s the real feeling of a common people of general category and expressed in right words.

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